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कंप्यूटर का अर्थ और परिभाषा पूरी जानकारी हिन्दी में

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कंप्यूटर का सामान्य परिचय –

 कंप्यूटर का अर्थ और परिभाषा- आज के युग में प्रचलित computer शब्द से सभी लोग परिचित हैं। बीसवीं शताब्दी की सर्वाधिक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज का नाम computer है। computer की importance और उपयोगिता के कारण आज के युग को कंप्यूटर युग के नाम से जाना जाता है। कंप्यूटर का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में एक ऐसा चित्र सामने आता है जिसे हम electronics से related कोई उपकरण समझते हैं, जो कि बहुत तीव्र गति से कार्य करता है।  यह एक विलक्षण मशीन है और इसमें अद्भुत क्षमता है। कंप्यूटर की वास्तविक क्षमता और कार्यप्रणाली के विषय में अधिकतर लोग नहीं जानते। कंप्यूटर का अर्थ और परिभाषा- साधारण रूप से कंप्यूटर को एक गणना करने की मशीन समझा जाता है। कंप्यूटर का अविष्कार चार्ल्स बैबेज ने किया था।

1.कंप्यूटर का अर्थ और परिभाषा – 

कंप्यूटर एक ऐसा electronic device है, जो प्राप्त सूचनाओं (information) को दिए गए निर्देशों के अनुरूप analyzed कर बहुत कम समय में सत्य एवं विश्वसनीय results output के रूप में हमारे सामने प्रस्तुत करता है। इसका मुख्य रूप से तीन काम हैं,
  1. data को लेना जिसे input कहा जाता है।  
  2. उस data को processing करना। 
  3. processed data को दिखाना, जिसे output कहा जाता है। 

कंप्यूटर का फुल फॉर्म क्या है? (full form of computer in hindi)

C – Commonly
O – Operated
M – Machine
P – Particularly
U – Used For
T – Technical and
E – Educational
R – Research

कंप्यूटर के प्रकार ( types of computer in  hindi)

जब भी हम कंप्यूटर शब्द सुनते हैं तब हमारे मन मस्तिष्क में personal computer की image आती है। जबकि वास्तव में कंप्यूटर बहुत सारे प्रकार के होते हैं। अलग-अलग design और size के भी आते हैं। हम जरूरत के अनुसार इनका उपयोग करते हैं। मूल रूप से कंप्यूटर तीन प्रकार के होते हैं –

1. Analog Computer

एनालॉग कंप्यूटर वैज्ञानिक और अभियांत्रिक कार्यों की पूर्ती के लिए laboratories और अनुसंधानों में प्रयोग किया जाता है। 
 

2. Digital Computer 

डिजिटल कंप्यूटर का प्रयोग अंकगणितीय गणनाएं करने के लिए किया जाता है। 

3. Highbrid Computer 

हायब्रिड कंप्यूटर का प्रयोग वैज्ञानिक अनुसंधानों में किया जाता है। इन तीनों कम्प्यूटर्स में सबसे प्रचलित डिजिटल कंप्यूटर है। डिजिटल कंप्यूटर चार प्रकार का होता है – 
  1. Micro Computer (माइक्रो कंप्यूटर)
  2. Mini Computer (मिनी कंप्यूटर)
  3. Main Frame Computer (मेन फ्रेम कंप्यूटर)
  4. Super Computer (सुपर कंप्यूटर)

1. Micro Computer 

  • माइक्रो कंप्यूटर आकर में छोटे होते हैं।
  • इन्हे एक जगह से उठा कर दूसरी जगह आसानी से ले जाया जा सकता है।
  • यह एक ही व्यक्ति के द्वारा चलाया जाता है। 
  • इसमें एक ही CPU होता है। 
माइक्रो कंप्यूटर भी आकर के अनुसार तीन प्रकार के होते हैं – 
 
  1. Desktop or Personal Computer 
  2. Laptop 
  3. Palmtop 

1. Desktop Or Personal Computer 

इस कंप्यूटर को आमतौर पर personal काम के लिए use किया जाता है इस तरह  कंप्यूटर छोटे, सस्ते, हल्के एवं useful होने के कारण सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। 

2. Laptop 

यह एक ऐसा माइक्रो कंप्यूटर है जिसे व्यक्ति अपनी गोद में रखकर काम कर सकता है और आसानी से कहीं भी ले जा सकता है। 

3. Palmtop 

पामटॉप एक ऐसा कंप्यूटर है जो हथेली के आकार का होता है। ये कंप्यूटर बाकी के दो कंप्यूटर से छोटा होता है। 

2. Mini Computer 

  • माइक्रो कंप्यूटर से ज्यादा गति वाले कंप्यूटर को मिनी कंप्यूटर कहते हैं।
  • मिनी कंप्यूटर में एक से अधिक CPU होते हैं। 
  • मिनी कंप्यूटर माइक्रो कंप्यूटर से महंगे होते हैं। 

3. Main Frame Computer

  • मिनी कंप्यूटर से अधिक गति एवं क्षमता वाले कंप्यूटर को मेन फ्रेम कंप्यूटर कहते हैं
  • इन कंप्यूटर में अनेक इनपुट आउटपुट Devices लगाए जा सकते हैं।
  • ये मिनी कंप्यूटर से महंगे होते हैं।

 सुपर कंप्यूटर क्या है ?

  • सुपर कंप्यूटर सबसे अधिक गति व क्षमता वाले कंप्यूटर होते हैं।
  • इसमें एक से अधिक CPU एक साथ कार्य कर सकते हैं।
  • सुपर कंप्यूटर पर एक साथ कई लोग कार्य कर सकते हैं।
  • सुपर कंप्यूटर सबसे बड़े कंप्यूटर होते हैं।
  • सुपर कंप्यूटर सबसे महंगे कंप्यूटर होते हैं।

कंप्यूटर की विशेषताएं

  • कंप्यूटर तेज़ गति से कार्य करता है। इसकी क्रियाएं Automatic होती हैं।
  • कंप्यूटर में गणनाएं 100 प्रतिशत सही होती है और कंप्यूटर सही परिणाम देते हैं।
  • कंप्यूटर कड़ी  मेहनत वाली मशीन है। कंप्यूटर कभी नहीं थकता, न उदासीन है; चाहे इसे कितने समय तक कार्य करना पड़े।
  • यह कई लाख को बहुत कम समय में लम्बे समय तक Store कर सकता है।
  • कंप्यूटर अनेक कार्य करने वाली मशीन है।
  • कंप्यूटर गणना करने के अलावा तर्कात्मक निर्णय भी ले सकता है।

कंप्यूटर का आविष्कार क्यों हुआ ?

जैसा कि आप जानते हैं आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। यदि हम अपने ओर दृष्टि डालें तो हमें दैनिक क्रिया-कलापों में कंप्यूटर हस्तक्षेप ही नजर आएगा। एक नजर हम इसकी उपयोगिता पर डालते हैं।  कंप्यूटर से तैयार किया गया बिजली का बिल हमारे घर पर आता है, बोर्ड एवं विश्वविद्यालय की परीक्षाओं की अंकतालिका कंप्यूटर द्वारा तैयार किये जाते हैं। रेलवे स्टेशनों पर रेल टिकट भी कंप्यूटर द्वारा बुक किये जाते हैं। Printing का अधिकांश कार्य कंप्यूटर के माध्यम से किया जाता है। कारखानों, उच्च शिक्षा, और शोधकार्यों में कंप्यूटर का उपयोग बहुत अधिक  है। चूंकि कंप्यूटर की उत्पत्ति English के शब्द कम्प्यूट से हुई है इसलिए कंप्यूटर का सम्बन्ध गणनाओं से ही लगाते हैं।
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान यह महसूस किया गया कि बेहतर सामरिक स्थिति प्राप्त करने के लिए आवश्यक है की विज्ञान तथा तकनीकी क्षेत्र में तेजी से विकास किया जाए। हवाई जहाजों, पनडुब्बियों तथा लंबी दूरी तक मार करने वाले टेंको से मुकाबला करने के लिए आवश्यक था कि ऐसी उच्च क्षमता वाली युक्ति का विकास किया जाए, जिसकी सहायता से ना दिखने वाले लक्ष्य पर भी आक्रमण किया जा सके। इस आवश्यकता की पूर्ति के लिए रडार का आविष्कार हुआ रडार की सहायता से शत्रु का स्थान, उसके आगे बढ़ने की दिशा एवं गति का पता लगाया जा सकता था।इसके बाद आवश्यक था कि बंदूकों को रडार द्वारा बताए गए निशानों पर केंद्रित किया जाए ताकि इनसे की जाने वाली गोलाबारी लक्ष्य का अचूक भेदन कर सके, परंतु इसके लिए अत्यंत सूक्ष्म समय में जटिल गणनाओं को करके सत्य एवं विश्वसनीय परिणाम प्राप्त होने आवश्यक थे। मनुष्य की तत्कालीन क्षमताओं के आधार पर यह संभव था।अब एक ऐसी मशीन की आवश्यकता महसूस हुई जो बिना किसी त्रुटि के इस प्रकार की घटनाओं को सूक्ष्म समय में कर सकें। यह आवश्यकता है कंप्यूटर के आविष्कार का प्रमुख कारण बनीं।

कंप्यूटर का विकास (development of computer)

मनुष्य के लिए सभ्यता के आरंभ में गणना की कोई आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि उस समय उसका जीवन घुमंतू था। बाद में मनुष्य भेड़ और गाय जैसे पशुओं को पालने लगा। जब वहां उन्हें चराने ले जाया करता था तब संध्या के समय वापस लौटने से पूर्व उन्हें गिनना पड़ता था। मनुष्य ने पहली बार जब भी गणना प्रारंभ की होगी तो वह अपनी उंगलियों पर ही की होगी। फिर उसने लकड़ी से जमीन पर रेखाएं खींची, फिर पत्थरों से गिनती की ओर रस्सी में गांठे बांधकर गिनती की। उंगली में गिनती का प्रभाव और परिणाम आज भी हम देखते हैं। जब भी हम अपने बच्चों को पढ़ाते हैं, हम अंको की अभिव्यक्ति के लिए उंगलियों का ही उपयोग करते हैं। छोटी संख्याओं को जोड़ने घटाने की शिक्षा देने में भी उंगलियों का उपयोग होता है।
चूंकि मनुष्य के पास 10 उंगलियां है, अतः उस समय 10 अंतिम बिंदु था। धीरे-धीरे वह सौ, हजार और दश हजार तक गिनना सीख गया जो अंतिम बिंदु बन गए। यही हमारी दशमलव पद्धति का मूल है। कालांतर में वह क्रमशः कंकडों, लकड़ियों के टुकड़ों, बच्चों के तनों पर अंकित चिह्नों, रस्सी में बांधी गई गांठो, अबेकस, दांतेदार पहियों पर आधारित गणना यंत्रों तथा विद्युत यांत्रिक मशीनों से गणना कार्य करने लगा। अब वह यह कार्य आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटरों से करने लगा है।

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